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Mahendra Kumar Mishra Inter College (MKMIC) is located in Kharauli, Unnao and established in 2004, recognized by the UP Board. School is providing Upper Primary, Secondary, High Secondary (6-12) level education and is being managed by Private Unaided Organisation. MKMIC is combines the very best in educational practices, powered and propelled by a philosophy of education that is diverse and yet truly modern.The highly trained and committed teaching faculty under the dynamic leadership of the Principal and Staff Members work together with a highly thought out training programme to initiate a process which gives confidence to every pupil to explore his/her complete potential. The use of conventional, contemporary and advanced methods of education guarantee the optimum exploration of human mind in imparting education as well as receiving it. The school inspires the student to achieve greater heights and spread their light of knowledge in pursuit of excellence. It instills in them the qualities necessary to become a good human being. The aim of the school is to give it’s student a sound moral education while devoting education attention to their intellectual, social & physical development through psychological devices, teaching aids.
‘शहर से सुदूर गंगा कटरी के क्षेत्र में शिक्षा के आभाव को देखते हुए पं. महेंद्र कुमार मिश्र के सुपुत्र श्री राधा कृष्ण मिश्र, श्री गंगा कृष्ण मिश्र, श्री गोपी कृष्ण मिश्र, श्री श्रीकृष्ण मिश्र, श्री हरी कृष्ण मिश्र, श्री राम कृष्ण मिश्र ने पिता की मृत्यु के बाद यह सामूहिक निर्णय लिया कि माता-पिता की पैतृक सम्पति को अपने व्यक्तिगत हित में न लेकर समाजहित में समर्पित कर दिया जाये। इस उद्देश्य को लेकर वर्ष २००२ में विद्यालय का निर्माण प्रारम्भ किया गया। आज २० वर्षों में विद्यालय गंगा कटरी के क्षेत्र से जुड़े गावों के बच्चों की शिक्षा में निरंतर वृद्धि कर रहा है। सबसे ज्यादा लाभ गावों की बालिकाओं को प्राप्त हुआ है। हमारे विद्यालय से पढ़े बालक व बालिकाएं सरकारी पदों व पुलिस में भर्ती हुए हैं। समाज की शैक्षिक योग्यता व भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय परिवार साल में अनेकों कार्यकर्मों के माध्यम से निरंतर लगा है। हम सभी बच्चों, अभिभावकों, अध्यापकों, सहयोगियों व सभी शुभचिंतकों को हार्दिक बधाई व धन्यवाद देना चाहते है और सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ। समाजहित के उद्देश्य व बच्चों के सार्वभौमिक विकास के लिए विद्यालय की स्थापना की गयी है। आप सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग, सहकार्य की अपेक्षा के साथ सादर प्रणाम। ’
‘शिक्षा जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है,शिक्षा के साथ साथ बालक / बालिकाओ का सर्वाँगीण विकास हो इसे दृष्टिगत रखते हुए विद्याभारती ने सन १९५२ मे गोरखपुर मे शिशु मंदिर / विद्या मंदिर का शुभारम्भ किया। अति पिछड़े ग्रामीणआंचल मे रहने वाले भैया / बहिने भी इससे वंचित न रहे , इस उद्देश्य से जन शिक्षा समिति का गठन हुआ। शहर से दूर गंगा कटरी मे रहने वाले बालक/ बालिकाओ का भी शिक्षा, संस्कार एवं सर्वाँगीण विकास विकास हो,मित्र बंधुओ को अथक प्रयत्नो एवं सुसंकल्प के परिणाम स्वरुप सियावती सरस्वती विद्यामंदिर पण्डित महेंद्र कुमार मिश्र इण्टर कॉलेज खरौली उन्नाव की स्थापना हुई। विद्या भारती से सम्बन्ध क्षेत्र मे एक मात्र विद्यालय खास तौर बहनो के लिए जो अस्टम कक्षा के बाद शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाती थी, उन्हें वरदान स्वरुप सिद्ध हुआ। "उतिष्ठ जाग्रत प्राप्त वरानिबोधत एवं सा विद्याया विमुक्तय " की उक्ति को सार्थक करने के लिए मिश्र बंधुओ का सराहनीय कार्य है। महर्षि अरविन्द घोष के अनुसार जो एक विद्यालय की स्थापना करता है, वह एक बंदीग्रह बंद करता है। पण्डित महेंद्र कुमार मिश्र इण्टर कॉलेज से पढ़े हुए भैया / बहिनो ने खेल कूद प्रतियोगिता मे जिले व प्रान्त तक स्थान प्राप्त किया , साथ ही विभिन्न प्रशासनिक पदों पर भी पहुंचे है। प्रधानचार्य पद पर विगत सोलह वर्षो से सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। विद्यालय के नाम सन्देश प्रेषित करते हुए प्रबंध समिति, अभिभावक, सुभचिन्तक जिला विद्यालय निरीक्षक, शिक्षक छात्र / छात्राये प्रशंसा के पात्र है। इस आशा अपेक्षा के साथ सधन्यवाद विद्यालय उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसारित रहे। ’
Students
Teachers
Classroom
Van/Bus
By becoming a teacher you'll get job satisfaction that few will experience. Other than parents, teachers have arguably the biggest influence on a child's life. The visible results you'll see from pupils are guaranteed to send you home with a sense of pride!.
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